Mahfil Shayari in Hindi महफ़िल और बज़्म पर शायरी - Net In Hindi.com

Mahfil Shayari in Hindi महफ़िल और बज़्म पर शायरी

Mahfil Shayari in Hindi महफ़िल और बज़्म पर शायरी

Mahfil Shayari in Hindi महफ़िल और बज़्म पर शायरी

Mahfil Shayari in Hindi

महफ़िल और बज़्म पर शायरी

दोस्तों “महफ़िल और “बज़्म” पर शेर ओ शायरी का एक संकलन हम इस पेज पर प्रकाशित कर रहे है, उम्मीद है यह आपको पसंद आएगा और आप विभिन्न शायरों के “महफ़िल और “बज़्म” के बारे में ज़ज्बात जान सकेंगे.

सभी विषयों पर हिंदी शायरी की लिस्ट यहाँ है.

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लबों पर ख़ामोशी आँखों में आँसू दिल में बे-ताबी

मैं उन की बज़्म-ए-इशरत से क़यामत ले के आया हूँ

~नसीम

 

छुपती है कोई बात छुपाए से सर-ए-बज़्म,

उड़ते हो जो तुम हम से तो उड़ती है ख़बर भी !! – बेख़ुद देहलवी

 

‘अनवार’ बज़्म है सजी हो जाए शाएरी,

उर्दू से हम को इश्क़ है अपनी ज़बान है !!

 

ये बज़्म-ए-मुहब्बत है इस बज़्म-ए-मुहब्बत में

दीवाने भी शैदाई परवानें भी शैदाई

 

तेरे होते हुए महफ़िल में जलाते हैं चिराग़

लोग क्या सादा हैं सूरज को दिखाते हैं चिराग़

~Faraz

 

Mahfil Shayari in Hindi

उससे बिछड़े तो मालूम हुआ की मौत भी कोई चीज़ है ‘फ़राज़’,

ज़िंदगी वो थी जो हम उसकी महफ़िल में गुज़ार आए !!

 

महफ़िल में तेरी यूँ ही रहे जश्न-ए-चरागां,

आँखों में ही ये रात गुज़र जाए तो अच्छा !! – साहिर लुधियानवी

 

भरे हैं तुझमें वो लाखों हुनर ऐ मजमअ-ए-ख़ूबी

मुलाक़ाती तिरा गोया भरी महफ़िल से मिलता है !!

 

भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया,

ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं !!

 

Mahfil Shayari in Hindi

ऐ दिल की ख़लिश चल यूँ ही सहीं चलता तो हूँ उन की महफ़िल में

उस वक़्त मुझे चौंका देना जब रँग में महफ़िल आ जाए

 

क़यामत क्या ये अय हुस्न-ए-दो आलम होती जाती है

कि महफ़िल तो वही है,दिलकशी कम होती जाती है

~जिगर

 

मिस्ल-ए-परवाना फ़िदा हर एक का दिल हो गया,

यार जिस महफ़िल में बैठा शम-ए-महफ़िल हो गया !!

 

उम्मीद ऐसी तो ना थी महफ़िल के अर्बाब-ए-बसीरत से

गुनाह-ए-शम्मा को भी जुर्म-ए-परवाना बना देंगे

 

यक-नज़र बेश नहीं, फुर्सते-हस्ती गाफिल

गर्मी-ए-बज्म है इक रक्स-ए-शरर होने तक

~ग़ालिब

 

Mahfil Shayari in Hindi

अपनी ही आवाज़ पर चौंके हैं हम तो बार बार,

ऐ रफ़ीक़ो बज़्म में इतनी भी तन्हाई न हो !! -अमीन राहत चुग़ताई

 

क़यामत क्या ये है हुस्ने दो आलम होती जाती है

के महफ़िल तो वही है दिलक़शी कम होती जाती है

 

ऐ दिल की ख़लिश चल यूँ ही सहीं,चलता तो हूँ उनकी महफ़िल में

उस वक़्त मुझको चौंका देना जब रंग पे महफ़िल आ जाए

 

मोहताज थी आईने की तस्वीर सी सूरत,

तस्वीर बनाया मुझे महफ़िल में किसी ने !! -वहशत रज़ा अली कलकत्वी

 

शमए रोशन को बुझाए ना कोई महफ़िल में

इसकी आगोश मे परवाने को जल जाने दो

 

Mahfil Shayari in Hindi

तेरी महफ़िल तेरे जल्वे फिर तक़ाज़ा क्या ज़रूर

ले उठा जाता हूँ ज़ालिम ले चला जाता हूँ मैं

 

शराबखानो कभी महफ़िलों की जानिब हम

ख़ुद अपने आप से टकराव टालने निकले

 

वो शमा की महफ़िल ही क्या

जिसमें दिल खाक न हो

मज़ा तो तब है चाहत का जब

दिल तो जले पर राख न हो

 

बज़्म-ए-अग़यार में आराम ये पायेंगे कहाँ,

तुझसे हम रूठ के जायेंगे तो जायेंगे कहाँ !!

 

 

Mahfil Shayari in Hindi

जाकर तेरी महफ़िल से कहाँ चैन मिलेगा,

अब अपनी जगह अपनी खबर जाए तो अच्छा !!

 

महफ़िल में तेरी यूँ ही रहे जश्न-ए-चरागां,

आँखों में ही ये रात गुज़र जाए तो अच्छा !!

 

रिन्दों की बज़्म-ए-कैफ़ में क्यों शैख़-ए-मोहतरम

झगड़ा उठा दिया है सवाब-ओ-अज़ाब का

 

तहसीन के लायक तेरा हर शेर है,

अहबाब करें बज़्म में अब वाह कहाँ तक..

 

हो गया हाँसिल किसी के प्यार में ये मर्तबा,

जा रहा हूँ बज्म में आगोश दर आगोश मैं !!

 

Mahfil Shayari in Hindi

बने हुए हैं वो महफ़िल में सूरत-ए-तस्वीर

हर एक को यूँ गुमा है की इधर को देखते हैं !!-दाग़

 

‘अज़ीज़’-ए-वारसी ये भी किसी का मुझ पे एहसान है

के हर महफ़िल में अब अपना भरम महसूस करता हूँ

इस महफ़िल-ए-कैफो मस्ती में

इस अंजुमन-ए-इरफ़ानी में

सब जाम बी-कफ बैठे ही रहे

हम पी भी गए छलका भी गए

 

अकेलापन कभी हमको अकेला कर नहीं सकता,

अकेलेपन को हम महबूब की महफ़िल समझते हैं

 

Mahfil Shayari in Hindi

उम्मीद ऐसी तो ना थी महफ़िल के अर्बाब-ए-बसीरत से

गुनाह-ए-शम्मा को भी जुर्म-ए-परवाना बना देंगे

 

आज तू कल कोई और होगा सद्र-ए-बज़्म-ए-मै

साकिया तुझसे नहीं,हम से है मैखाने का नाम

 

मैं खुलकार आज महफ़िल में ये कहता हूँ मुझे तुझसे

मोहब्बत है,मोहब्बत है मोहब्बत है मोहब्बत है

 

होश से आरी^ रही दीवानगी अपनी ‘ज़फ़र’,

बा-ख़बर महफ़िल में रह कर बेख़बर वापस हुए!! ^free

 

वो मुझको देखकर कुछ अपने दिल में झेंप जाते हैं,

कोई परवाना जब शम-ए-सर-ए-महफ़िल से मिलता है!!

 

ख़ल्वत बनी हुई थी तिरी अंजुमन मगर,

मैं आ गया तो बज़्म का नक़्शा बदल गया !!

 

Mahfil Shayari in Hindi

यूँ चुराईं उस ने आँखें सादगी तो देखिए,

बज़्म में गोया मिरी जानिब इशारा कर दिया !!

 

हम भी ना-वाक़िफ़ नहीं आदाब-ए-महफ़िल से मगर

चीख़ उठें ख़ामोशियाँ तक ऐसा सन्नाटा भी क्या

 

ऐसा साक़ी हो तो फिर देखिए रंगे-महफ़िल,

सबको मदहोश करे, होश से जाए ख़ुद भी !! -फ़राज़

 

उस की महफ़िल में बैठ कर देखो

ज़िन्दगी कितनी ख़ुबसूरत है !! -क़ाबिल अजमेरी

 

जाँ-सोज़ की हालत को जाँ-सोज़ ही समझेगा

मैं शमा से कहता हूँ महफ़िल से नहीं कहता क्योंकि

 

 

इस बज़्म में इक जश्न-ए-चराग़ाँ है उन्ही से,

कुछ ख़्वाब जो पलकों पे उजाले हुए हम हैं !!

 

देखें अब रहता है किस किस का गरेबाँ साबित

चाक-ए-दिल लेके तिरी बज़्म से दीवाने चले -अहमदराही

 

Mahfil Shayari in Hindi

क़द ओ गेसू लब-ओ-रुख़्सार के अफ़्साने चले

आज महफ़िल में तिरे नाम पे पैमाने चले -अहमद राही

 

भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया,

ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं !!

 

हमारा ज़िक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,

दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे

 

दिल-गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए

याद-ए-जानाँ से कोई शाम न ख़ाली जाए !!

 

नज़र नज़र पे सर-ए-बज़्म है नज़र उन की

नज़र नज़र में सलाम-ओ-पयाम होता है !!

 

जश्न हो इतनी गुंजाईश तो छोड़ आया था,

न जाने क्यों वहाँ महफ़िल नहीं हुयी अब तक.!!

 

बू-ए-गुल, नाला-ए-दिल, दूद-ए-चिराग़-ए-महफ़िल,

जो तेरी बज़्म से निकला सो परीशाँ निकला !!

 

Mahfil Shayari in Hindi

रंग-ए-महफ़िल चाहती है इक मुकम्मल इंक़लाब,

चंद शम्माओं के भड़कने से सहर होती नहीं !!

भरे हैं तुझ में वो लाखों हुनर ऐ मजमअ-ए-ख़ूबी,

मुलाक़ाती तिरा गोया भरी महफ़िल से मिलता है !! -दाग़ देहलवी

 

हम भी ना-वाक़िफ़ नहीं आदाब-ए-महफ़िल से मगर,

चीख़ उठें ख़ामोशियाँ तक, ऐसा सन्नाटा भी क्या !!

 

बने हुए हैं वो महफ़िल में सूरत-ए-तस्वीर,

हर एक को यूँ गुमा है की इधर को देखते हैं !! –

 

वो आज आये हैं महफ़िल में चांदनी लेकर,

कि फिर रौशनी में नहाने की रात आयी…

 

Mahfil Shayari in Hindi

कभी उस परी का कूचा, कभी इस हसीं की महफ़िल

मुझे दरबदर फिराया, मेरे दिल की सादगी ने …

 

छुपाये दिल में ग़मों का जहान बैठे हैं

तुम्हारी बज़्म में हम बेज़बान बैठे हैं.!!

 

तेरी महफ़िल से दिल कुछ और तनहा होके लौटा है

ये लेने क्या गया था और क्या घर लेके आया है

 

ऐ दिल की ख़लिश चल यूँ ही सहीं चलता तो हूँ उनकी महफ़िल में

उस वक़्त मुझको चौंका देना जब रंग पे महफ़िल आ जाए

 

शराबखानो कभी महफ़िलों की जानिब हम

ख़ुद अपने आप से टकराव टालने निकले.!!

 

Mahfil Shayari in Hindi

‘शाद’ तू बज़्म के आदाब समझता ही नहीं

और भी लोग यहाँ तेरे सिवा बैठे हैं

~शाद

 

देख ले जान-ए-वफ़ा आज तेरी महफ़िल में

एक मुजरिम की तरह अहल-ए-वफ़ा बैठे हैं

~शाद

 

फ़लक़ दुश्मन,मुखालिफ़ ग़र्दिश-ए-अय्याम है साक़ी

मगर हम हैं,तेरी महफ़िल है,दौर-ए-जाम है साक़ी.!!

 

उठ के महफ़िल से मत चले जाना

तुमसे रौशन ये कोना-कोना है.!!

 

न तो मैं शोर करता हूँ,ये फिर भी जान लेती है

भरी महफ़िल में तन्हाई,मुझे पहचान लेती है.!!

 

Mahfil Shayari in Hindi

मुझ तक कब उनकी बज़्म में आता था दौरे-जाम

साक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में.!!

 

हिज्र की रात है और उनके तसव्वुर का चराग़।।

बज़्म की बज़्म है तन्हाई की तन्हाई है..!!

 

सर-ए-महफ़िल निगाहें मुझ पे जिन लोगों की पड़ती है।।

निगाहों के हवाले से वो चेहरे याद रखता हूँ..!!

 

तेरी महफ़िल तेरे जलवे फिर तकाज़ा क्या ज़रूर।।

ले उठा जाता हूँ ज़ालिम ले चला जाता हूँ मैं..!!

 

Mahfil Shayari in Hindi

हिज्र की रात है और उनके तसव्वुर का चराग़।।

बज़्म की बज़्म है तन्हाई की तन्हाई है..!!

 

मुझ तक कब उनकी बज़्म में आता था दौरे जाम।।

साक़ी ने कुछ मिला न दिया हो शराब में..!!

 

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