Sham Shayari in Hindi शाम शायरी

Sham Shayari in Hindi शाम शायरी

Sham Shayari in Hindi शाम शायरी

Sham Shayari in Hindi

शाम शायरी

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ढलती हुई सुरमई शाम पर शेर ओ शायरी

Hindi Shayari on Beautiful, calm and colorful Evening

List of all Shayari Topics

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ये इंतजार ग़लत है की शाम हो जाए

जो हो सके तो अभी दौर-ऐ-जाम हो जाए

~नरेश कुमार ‘शाद’

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कुछ और तीरगी-ए-शाम-ए-ग़म सही ‘जामी’

कुछ और अपने चराग़ों की लौ बढ़ा दूँगा

~ख़ुर्शीद अहमद ज़ामी

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मैं तमाम शब का थका हुआ,वो तमाम शब का जगा हुआ

ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर,उसके साँथ शाम गुज़ार लूँ

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हिकायत-ए-ख़लिश-ए-जान-ए-बेक़रार न पूछ

शुमार-ए-शाम-ओ-सहर ऐ निगाह-ए-यार न पूछ

*** Sham Shayari in Hindi

दिल भी बुझा हो शाम की परछाइयाँ भी हों,

मर जाइये जो ऐसे में तन्हाइयाँ भी हों

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सुना कि अब भी सर-ए-शाम वो जलाते हैं,

उदासियों के दिये मुंतज़िर निगाहों में

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आ गले लग जा हमारे तीरगी-ए-शाम-ए-ग़म,

रौशनी के नाम पर धोखे बहुत खाते हैं हम

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ये शाम और उस पर तेरी यादों की हलावत,

इक जाम में दो शै का नशा ढूंढ रहा हूँ

 

*** Sham Shayari in Hindi

तुम आओ तो पंख लगा कर उड़ जाए ये शाम,

मीलों लम्बी रात सिमट कर पल दो पल हो जाए

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होती है शाम आँख से आँसू रवाँ हुए

ये वक़्त क़ैदियों की रिहाई का वक़्त है

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ख़्वाबों के पंछी कब तक शोर करेंगे पलकों पर

शाम ढलेगी और सन्नाटा शाखों पर हो जाएगा

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इतना भी ना-उम्मीद दिल-ए-कम-नज़र न हो

मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो

*** Sham Shayari in Hindi

हुई जो शाम तो अपना लिबास पहना कर

शफ़क़ को जैसे दम-ए-इंतिज़ार भेजा है

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दीदा-ओ-दिल को संभालो कि सर-ए-शाम फिराक

साज़-ओ-सामान बहम पहुँचा है रुसवाई का

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कँपकँपाती शाम ने, कल माँग ली चादर मेरी

और जाते-जाते, जाड़े को इशारा कर दिया

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मगर ज़िक्र-ए-शाम-ए-अलम जब भी आया

चिराग़-ए-सहर बुझ गया जलते जलते

~क़मर जलालवी

*** Sham Shayari in Hindi

हमारे घर के क़रीब एक झील होती थी

और उस में शाम को सूरज नहाया करता था

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शाम महके तेरे तसव्वुर से

शाम के बाद फिर सहर महके..

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शाम-ए-ग़म हम पे ये बात रौशन हुई,

सोज़-ए-दिल चाहिये आदमी के लिये

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निकहत-ए-ज़ुल्फ़-ए-परीशां,दास्तान-ए-शाम-ए-ग़म

सुबह होने तक इसी अंदाज़ की बातें करो

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शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो

बेख़ुदी बढ़ती चली है राज़ की बातें करो

*** Sham Shayari in Hindi

शाम से आँख में नमीं सी है

आज फिर आप की कमी सी है

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गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं

हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं

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कई ख्वाब मुस्कुराये सरे-शाम बेखुदी में

मेरे लब पे आ गया था तेरा नाम बेखुदी में

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आप ही होगा उसे शाम का एहसास “क़मर”

चढ़ रहा है अभी सुरज इसे ढल जाने दो

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मुझे उस सहर की हो क्या ख़ुशी जो हो जुल्मतों में घिरी हुई

मिरी शाम-ए-ग़म को जो लूट ले मुझ उस शहर की तलाश है

*** Sham Shayari in Hindi

अब तो हर शाम गुज़रती है उसी कूचे मे,

ये नतीजा हुआ नासेह तेरे समझाने का !!

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उदास शाम की यादों भरी सुलगती हवा,

हमें फिर आज पुराने दयार ले आई !!

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वो यार है जो ख़ुश्बू की तरह जिसकी ज़ुबा उर्दू की तरह

मेरी शाम-ओ-रात मेरी कायनात वो यार मेरा सैयाँ सैयाँ

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पहले सागर से तो छलके मय-ए-गुलफाम का रंग,

सुबह के रंग में ढल जाएगा खुद शाम का रंग !!

शाम को बाम पर वो आए तो,

जैसे कोई चराग़ जलता है !!

*** Sham Shayari in Hindi

अपने होने का हम एहसास दिलाने आए

घर में इक शमआ पसे-शाम जलाने आए.!!

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कभी कभी शाम ऐसे ढलती है जैसे घूंघट उतर रहा हो,

तुम्हारे सीने से उठता धुआँ हमारे दिल से गुज़र रहा हो !!

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ज़िन्दगी की शाम ढलती जा रही है,

घुल रहा है देखिये सिन्दूर मुझमें.!!

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वही ख़्वाब ख़्वाब हैं रास्ते वही इंतज़ार सी शाम है

ये सफर है मेरे इश्क़ का,न दयार है न क़याम है !!-सुख़नवर

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और बस क्या कमी थी शाम में तेरे बगैर,

शाम खुद को ढूढ़ती थी शाम में तेरे बगैर !! -आतिशमिज़ाज

*** Sham Shayari in Hindi

दिल सा मस्कन छोड़ के जाना इतना भी आसान नहीं,

सुब्ह को रस्ता भूल गए तो शाम को वापस आओगे !!

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हमने एक शाम चिरागो से सज़ा रखी है,

शर्त लोगो ने हवाओं से लगा रखी है …

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हम अपनी शाम को जब नज़र-ए-जाम करते हैं

अदब से हमको सितारे सलाम करते है!!

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तेरे गुलनार से दहके हुए रूख़सारों पर,

शाम का पिघला हुआ सुर्ख-ओ-सुनहरी रोग़न !!

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गुल हुई जाती है अफ़सुर्दा सुलगती हुई शाम,

धुल के निकलेगी अभी,चश्म-ए-महताब से रात !! -फ़ैज़

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बस एक मोती सी छब दिखाकर, बस एक मीठी सी धुन सुनाकर

सितारा-ए-शाम बनके आया, ब’रंग-ए-ख्वाब-ए-सहर गया वो !!

*** Sham Shayari in Hindi

कोई शाम के वक़्त आएगा लेकिन,

सहर से हम आँखें बिछाए बैठे हैं !!

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जिसमें न चमकते हों मोहब्बत के सितारे,

वो शाम अगर है तो मेरी शाम नहीं है !!

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खुशबू से भरी शाम में जुगनू के कलम से,

इक नज़्म तेरे वास्ते लिक्खेंगे किसी दिन!!

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शाम से उन के तसव्वुर का नशा था इतना,

नींद आई है तो आँखों ने बुरा माना है !!

*** Sham Shayari in Hindi

 

दिल-गिरफ़्ता ही सही बज़्म सजा ली जाए

याद-ए-जानाँ से कोई शाम न ख़ाली जाए !!

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खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में

एक पुराना खत खोला अनजाने में

शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं

चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में ..

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हुई शाम उनका ख़याल आ गया

वही ज़िंदगी का सवाल आ गया …

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कभी तो आसमाँ से चाँद उतरे जाम हो जाए,

तुम्हारे नाम की एक खूबसूरत शाम हो जाए !!

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कोई लश्कर है के बढ़ते हुए ग़म आते हैं

शाम के साये बहुत तेज़ क़दम आते हैं.!!

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ज़ुल्मत-ए-शाम से भी नूर-ए-सहर पैदा कर

क़ल्ब शबनम का सितारों की नज़र पैदा कर ~फ़ना निज़ामी

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किसी उर्से-दरवेश पे,अक़ीदत-मंदों की तरह

हर शाम मुझे तेरी यादें,घेर लेती हैं..!!

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शाम कुछ देर हि बस सुर्ख़ रही, हालाँकि

खून अपना तो बहुत देर उबाला मैंने.!!

*** Sham Shayari in Hindi

एक आधा बुझा दिन मिलता है, एक आधी जली रात से

और वो कहते हैं , क्या खूबसूरत शाम है..!!

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उधर इस्लाम ख़तरे में,इधर है राम ख़तरे में

मगर मैं क्या करूँ,है मेरी सुब्हो-शाम ख़तरे में..!!

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शाम आती है तो ये सोच के डर जाता हूँ

आज की रात मेरे शहर पे भारी तो नहीं..!!

*** Sham Shayari in Hindi

शाम, उदासी, ख़ामोशी, कुछ कंकर, तालाब और मैं

हर शब पकड़े जाते हैं , गहरी नींद, क़िताब और मैं

 

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