पहले से जानिए 29 को या 30 को दिखेगा चाँद और आसमान में कहाँ दिखाई देगा !

पहले से जानिए 29 को या 30 को दिखेगा चाँद

दोस्तों ईद पर हमेशा यह सस्पेंस बना रहता है की चाँद 29 को दिखेगा या 30 को, इसी से यह तय होता है की ईद कब मनाई जाएगी. क्यों की ईद चाँद देखकर मनाई जाती है, इसलिए अगर चाँद इस्लामिक केलेंडर की 29 तारीख यानि 4 जून को दिखा तो ईद 5 जून को मनाई जाएगी, लेकिन अगर चाँद 4 जून को नहीं दिखा तो फिर 30 रोज़े पूरे कर ईद 6 जून को मनाई जाएगी. 

 

आइये जानते हैं की 4 जून को चाँद दिखने की कितनी पोसिबिलिटी  सम्भावना है, और यह भी जानते हैं की आसमान में चाँद कहाँ दिखाई देगा.


 4 जून यानि 29 वें रोज़े को आसमान में चाँद की पोजीशन

आसमान में कहाँ दिखाई देगा चाँद !

4 जून की शाम 7 बजकर 15 मिनट पर आसमान में चाँद बुध ग्रह मतलब प्लेनेट मरकरी के पास दिखाई देगा, बुध ग्रह सूरज डूबने के बाद किसी छोटे सितारे की तरह दिखाई देता है, चाँद के कुछ ऊपर एक लाल रंग का तारा दिखाई देगा जो की तारा नहीं बल्कि मार्स यानि मंगल ग्रह है. चित्रों में देखें,

चाँद रात 8 बजे तक दिखाई देता रहेगा, तब तक काफी अँधेरा हो जाता है और इस वजह से बारीक़ चाँद के भी दिखाई देने की पोसिबिलिटी बढ़ जाती है. इस पेज को अपने दोस्तों को भी शेयर कर दीजिये ताकि वो आसानी से ईद का चाँद देख पायें.

 

Eid Ka chand Viral

 

eid ka chand viral

अगर चाँद 5 जून को दिखाई दिया तो 

दोस्तों अगर किसी वजह से चाँद 4 जून को नहीं बल्कि 5 जून को दिखाई दिया तब यह मंगल ग्रह के पास दिखाई देगा.

ईद मुबारक शायरी 

ईद मुबारक शायरी 

खगोल विज्ञान के आश्चर्यजनक तथ्य Amazing Astronomy facts in hindi

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खगोल विज्ञान के कुछ आश्चर्यजनक तथ्य

एस्ट्रोनॉमी खगोल विज्ञान एक बहुत ही रोचक विषय है, विज्ञान की इस शाखा के अंतर्गत ब्रह्मांड को समझने का प्रयत्न किया जाता है, हमारा ब्रह्मांड अकल्पनीय रूप से अनंत है, ब्रह्मांड में कई अनोखी चीजें पाई जाती है,  वैज्ञानिक जब भी ब्रह्मांड का कोई एक रहस्य सुलझाते हैं तो उनके सामने कई और नए रहस्य प्रकट हो जाते हैं, ब्रह्मांड अनोखी चीजों से भरा हुआ है, मनुष्य की यह प्रकृति है कि वह अपने आसपास की दुनिया को समझने का भरपूर प्रयत्न करता है, वैज्ञानिक खगोल विज्ञान के अंतर्गत टेलिस्कोप, स्पेस शटल, कंप्यूटर और विभिन्न आधुनिक यंत्रों का उपयोग कर ब्रहम्मांड  को समझने का प्रयत्न कर रहे, यहां हम एस्ट्रोनॉमी के कुछ अनोखे तथ्य प्रस्तुत कर रहे, इन तथ्यों को पढ़कर आप वास्तव में आश्चर्यचकित हो जाएंगे.

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खगोल विज्ञान के तथ्य Astronomy facts in hindi

हमें सूर्य और चंद्रमा एक ही आकार के दिखाई देते हैं, परंतु वास्तव में सूर्य, चंद्रमा से 400 गुना बड़ा है, चंद्रमा की तुलना में पृथ्वी से सूर्य 400 गुना अधिक दूरी पर है यही कारण है कि दोनों का बराबर दिखाई देते हैं, सूर्य ग्रहण के समय चंद्रमा पूरी तरह सूर्य को ढक लेता है.

*शुक्र ग्रह का एक दिन पृथ्वी के 1 वर्ष से बड़ा होता है,  उससे भी अजीब बात यह है कि शुक्र ग्रह पर एक दिन, एक वर्ष से ज्यादा लंबा होता है,  शुक्र ग्रह का 1 वर्ष शुक्र ग्रह के 1 दिन से छोटा होता है.

अगर आप चंद्रमा पर कदम रखेंगे तो आपके कदमों के निशान वहां लाखों सालों तक सुरक्षित रहेंगे, क्योंकि वहां पर वायुमंडल और जल नहीं है और ना ही वहां किसी प्रकार के जीव है जो इन निशानों को मिटाएं.

सूर्य के द्वारा उत्पन्न में की गई ऊर्जा का केवल एक खरबवें  हिस्से का आधा भाग ही पृथ्वी तक पहुंचता है.

अंतरिक्ष  मैं रहने वाले  एस्ट्रोनॉट्स के पैरों के तलवों की पूरी चमड़ी निकलने लगती है, इसका कारण यह है कि अंतरिक्ष  मैं एस्ट्रोनॉट चलते नहीं है, क्योंकि वहां पर गुरुत्वाकर्षण नहीं है इसीलिए पैरों पर कोई भार नहीं पड़ता.

सूर्य के अंदर  10 लाख प्रथ्वियाँ समा सकती हैं

स्पेस में जाने पर एस्ट्रोनॉट्स की लंबाई बढ़ जाती है.

अंतरिक्ष बहुत दूर नहीं है, अगर आप अपनी कार को सीधे ऊपर की तरफ चला सके तो आप केवल 1 घंटे में ही अंतरिक्ष में पहुंच जाएंगे.

अंतरिक्ष  में अगर आप रोए तो आपकी आंखों के आंसू नीचे नहीं गिरते हैं

पृथ्वी के आसपास 10 लाख कबाड़ के टुकड़े पृथ्वी का चक्कर लगा रहे हैं, यह टुकड़े रॉकेट और सैटेलाइटो के अवशेष हैं.

प्लूटो का आकार संयुक्त राज्य अमेरिका से भी आधा है

हमारे सूर्य सौरमंडल को मिल्की वे गैलेक्सी का एक चक्कर लगाने में 230 मिलीयन साल का समय लगता है, आज हमारा सौरमंडल जीस स्थान पर है 230 मिलीयन साल पहले वह इसी स्थान पर था, तब पृथ्वी पर पहले डायनासोर उत्पन्न हो रहे थे.

पृथ्वी धीमे होती जा रही है, डायनासोरों के वक्त दिन 23 घंटे का होता था परंतु अब  24 घंटे का होता है

चंद्रमा एक दिन अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पानी का प्रमुख स्रोत बन जाएगा क्योंकि यहां पर अत्यधिक मात्रा में पानी मौजूद है.

तारों और गेलेक्सियों को देखना अतीत में देखना है, क्योंकि तारे और गैलेक्सी हमसे इतनी अधिक दूरी पर स्थित होते हैं इनके प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने में कई वर्षों का समय लगता है, इसलिए हम उनका अतीत देख रहे होते हैं,  हम तारों और गेलेक्सियों का वर्तमान कभी भी नहीं देख सकते.

अंतरिक्ष में पूरी तरह शांति होती है, क्योंकि वहां किसी भी प्रकार की ध्वनि नहीं होती है.

बृहस्पति, शनि, यूरेनस, और नेपच्यून ग्रहों पर चला नहीं जा सकता क्योंकि इन ग्रहों कि कोई भी ठोस पता नहीं है.

सौरमंडल का सबसे ऊंचा पर्वत ओलंपस है जो की मंगल ग्रह पर मौजूद है.

अगर किसी एरोप्लेन में प्लूटो तक उड़कर जाया जा सके तो इस यात्रा में 800 वर्ष का समय लगेगा.

कार के आकार का एक उल्कापिंड औसतन एक वर्ष में पृथ्वी से टकराता है यह वायुमंडल में ही जलकर  खत्म हो जाता है

मंगल ग्रह पर सूर्यास्त  नीले रंग का दिखाई देता है

यूरेनस ग्रह अपने अक्ष पर पूरी तरह झुका हुआ है.

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English translation of the article

Amazing Astronomy Facts in Hindi

Some Astonishing Astrophysics

Astronomy astronomy is a very interesting topic, under this branch of science, it is attempted to understand the universe, our universe is unimaginable, infinite, many unique things are found in the universe, whenever a scientist is a secret of the universe So many other new secrets are manifested in front of them, the universe is full of unique things, this nature of man is that it is around We strive to understand the world, scientists are trying to understand the Brahmand using the telescope, space shuttle, computer and various modern instruments under astronomy, here we are presenting some unique facts of astronomy, these facts You will be really surprised by reading.

Astronomy Facts Astronomy facts in hindi

We see the sun and the moon in the same shape, but in reality the Sun is 400 times larger than the Moon, compared to the Moon, the Sun is 400 times greater than the Earth. This is the reason that both appear equally, the solar eclipse The Moon covers the sun completely. * One day of Venus is larger than the Earth’s 1 year, the odd thing is that Venus is on the planet one day, more than a year long 1 year of Venus is less than 1 day of planet Venus. If you step on the moon, then your footprints will be safe for millions of years, because there is no atmosphere and no water there and there is no The creatures that erase these marks. Only half of the triangular part of the energy generated by the Sun reaches the Earth. Astronauts living in Astronauts The entire skin of the soles of the feet starts flowing, the reason is that space does not move astronaut because there is no gravity there, so there is no weight on the feet. There are ten million prathavasya inside the Sun. Astronauts The length increases. The space is not too far, if you can drive your car directly upwards then you can reach the space within only 1 hour. In Aangekantriksh if you are putting wept when tear down your eyes are falling around the pieces of the Earth’s 10 million junk around Earth, the pieces are remnants of the rocket and Satelaito. Pluto’s size is even halfway to the United States, our sun solar system takes 230 million years to make one round of the Milky Way galaxy, today our solar system is at the place of 230 years before it was at that place, then on Earth The first dinosaurs were arising. The earth is getting slower, at the time of dinosaurs, the day was 23 hours but now it is 24 hours. Chandrama will become one of the major sources of water for astronauts because there is excessive amount of water present here. Viewing tanks and galaxies To see in the past, because the stars and the galaxies are located at such a distance from us, their light takes many years to reach the earth. That is why we are seeing their past, we can never see the present of stars and galaxies. There is total peace in the world because there is no sound of any kind. Jupiter, Saturn, Uranus, and Neptune Can not move on planets because there is no concrete address of these planets. The highest mountain in the Solar System is the Olympus, which is present on Mars. If it can fly to Pluto in an aeroplane, then this journey will take 800 years. A meteorite shaped like a balloon hits the earth in an average of one year. The atmosphere ends up in the atmosphere. Sunset blue appears on the planet Mars. The planet Uranus is completely tilted on its axis. Astronomy facts in hindi, khagol vidyan ke tathy, amazing astronomy facts in hindi, solar system facts in hindi, universe facts in hindi, planet facts in hindi,


Hinglish font me article

khagol vigyaan ke aashcharyajanak tathy

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अकल्पनीय गति से गतिमान है सूर्य speed and movements of Sun in hindi

तारे और ग्रह में क्या अंतर होता है Difference Between Stars and Planets hindi

सूर्य एक जगह स्थित है या गतिमान है?

क्या सूर्य सौर मंडल के केंद्र में स्थिर रहता है?  विज्ञान की प्राथमिक किताबों में यह बताया जाता है कि सूर्य सौरमंडल के केंद्र में स्थित होता है,  परंतु क्या सूर्य एक जगह स्थिर रहता है या गति करता है, सूर्य, सौरमंडल के केंद्र में स्थित होता है परन्तु स्थिर नहीं होता यह विभिन्न प्रकार की गति कर रहा है,  सूर्य वास्तव में कितने प्रकार की गति कर रहा है इसकी कल्पना करना और इस गति की गणना करना अभी तक संभव नहीं हो पाया है.

सूर्य की घूर्णन गति

पृथ्वी की तरह सूर्य भी अपने अक्ष पर घूमता है हमारी पृथ्वी अपने अक्ष पर 24 घंटों में एक बार घूर्णन करती है,  सूर्य भी अपने अक्ष पर घूमता है, सूर्य गैस का एक गोला है यह पृथ्वी की तरह ठोस नहीं है इसीलिए इसके अलग अलग हिस्सों में अलग अलग घूर्णनकाल होता है यह 24 से 27 दिनों में अपने अक्ष में एक चक्र पूर्ण कर लेता है,  सूर्य के मध्य का हिस्सा तेज़ गति से घूमता है तथा ध्रुवीय हिस्सा धीमी गति से घूमता है.

सूर्य की डगमगाहट whobling

कई ग्रह, उपग्रह और द्रव्यमान पिंड सूर्य का चक्कर लगाते हैं इनके गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से सूर्य अपने स्थान से थोड़ा डगमगा  जाता है इससे whobling कहते हैं, यह बहुत कम मात्रा में होता है, क्योंकि सूर्य का द्रव्यमान ग्रहों के द्रव्यमान की तुलना में बहुत अधिक है.

सूर्य गैलेक्सी के केंद्र का चक्कर लगाता है

सूर्य मिल्की वे गैलेक्सी का एक तारा है, यह मिल्की वे के केंद्र का चक्कर लगाता है इसकी गति लगभग 250 किलोमीटर प्रति सेकंड है, गैलेक्सी के सभी तारे केंद्र की परिक्रमा करते हैं केंद्र के पास स्थित तारे  धीमी गति से जबकि गैलेक्सी के केंद्र से दूर स्थित तारे अधिक गति से परिक्रमा करते हैं सूर्य के केंद्र से अधिक दूरी पर है इसलिए इसकी 250 किलोमीटर प्रति सेकंड है.

सूर्य मिल्की वे गैलेक्सी के साथ गति करता है

ब्रह्मांड में हमारी गैलेक्सी मिल्की वे स्थिर नहीं है यह एंड्रोमेडा गैलेक्सी की ओर बढ़ रही है इस में स्थित सभी तारे भी एंड्रोमेडा गैलेक्सी की ओर जा रहे हैं इसलिए सूर्य भी मिल्की वे गैलेक्सी के साथ एंड्रोमेडा गैलेक्सी की ओर गति कर रहा है, वैज्ञानिक इस गति का मापन नहीं कर पाए हैं.

सूर्य की इन विभिन्न प्रकार की गतियों  के अलावा भी कई प्रकार की गति होती है क्योंकि मिल्की वे गैलेक्सी का  क्लस्टर और यह क्लस्टर जिस सुपरक्लस्टर का हिस्सा है वह भी गति कर रहे हैं, इसलिए सूर्य  और पृथ्वी भी इस प्रकार की गति करते हैं, इन विभिन्न प्रकार की गतियों की एक साथ कल्पना कर पाना या इसका कंप्यूटर मॉडल बना पाना अभी तक संभव नहीं हो पाया है.

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English article

Sun speed and movement of Sun in hindi

Is the Sun situated in one place or is it moving?
Is the sun stable in the center of the solar system? In the primary books of science, it is said that the sun is located in the center of the solar system, but whether the sun remains in one place or moves, the sun is located in the center of the solar system, but not stable, Imagine how many types of motion the Sun is actually doing, and it has not been possible to calculate this speed.

Rotational motion of the sun

Like the Earth, the Sun revolves around its axis, our earth rotates on its axis once in 24 hours, the sun revolves around its axis, the Sun is a ball of gas, it is not as solid as the Earth, so its different parts It has different rotational period, it completes one cycle in its axis in 24 to 27 days, the middle part of the sun rotates at a high speed and the polar part rotates in a slow motion.

Whobling of the sun’s sting

Many planets, satellites, and mass bodies revolve around the sun, due to the effect of their gravity, the sun gets slightly dumped from its place, whobling it says, it is in very small quantities, because the mass of the Sun is much more than the mass of planets is.

Sun goes round to the center of the galaxy

Sun Milky Way is a star of Galaxy, it revolves around the center of the Milky Way, its speed is approximately 250 kilometers per second, all the galaxy stars orbiting the center, the stars near the center slow down while away from the center of the Galaxy The stars located in orbit are more orbital than the center of the sun, so it is 250 kilometers per second.

Sun travels with Milky Way galaxy

Our Galaxy Milky Way in the Universe is not stable, it is moving towards the Andromeda Galaxy. All the stars located in this direction are also heading towards the Andromeda Galaxy, hence the Sun is also moving towards the Andromeda Galaxy along with the Milky Way Galaxy, There are many types of motion besides these different kinds of motion, because the Milky Way Galaxy Luster and this cluster are part of the superclusters that are moving too, so the sun and the earth also do this kind of speed, making it possible to visualize these different types of motion together or make its computer model is not possible yet. Sun movement in hindi, sun speed in hindi, sun rotation in hindi,

Hinglish article

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पक्षियों में सबसे अजीब होता है सेक्रेटरी बर्ड secretary bird in hindi

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अफ्रीका का अजीब पक्षी सेक्रेटरी बर्ड secretary bird 

विश्व में कई प्रकार के रंग-बिरंगे और अनोखे पक्षी पाए जाते हैं, अनोखे दिखने वाले पक्षियों में सेक्रेटरी बर्ड का नाम भी प्रमुख है,  न केवल इसका नाम अजीब है बल्कि इसका शरीर भी अजीब होता है, इसका आधा शरीर बाज की तरह और आधा क्रेन सारस की तरह होता है, सेक्रेटरी बर्ड  सूडान देश का राष्ट्रीय पक्षी है, सेक्रेटरी बर्ड अफ्रीका महाद्वीप में ही पाया जाता है, आइए जानते हैं इस अजीब पक्षी के बारे में कुछ रोचक तथ्य.

सेक्रेटरी बर्ड  के बारे में कुछ रोचक तथ्य facts about secretary bird

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सेक्रेटरी बर्ड secretary bird का वैज्ञानिक नाम (Sagittarius serpentarius) है,  यह एक बड़े आकार का जमीन पर चलने वाला शिकारी पक्षी है.

सेक्रेटरी बर्ड secretary bird  अफ्रीका महाद्वीप के उप सहारा इलाकों में  पाया जाता है.

सेक्रेटरी बर्ड secretary bird खुले मैदान और सवाना घास के मैदान पसंद करता है यह अर्ध रेगिस्तानी इलाकों में भी रहता है, तथा यह कभी-कभी  कम घने जंगलों और झाड़ीदार जंगलों में भी देखा गया है.

यह पक्षी समुद्र से अलग अलग ऊंचाइयों पर पाया जाता है इसे मुख्यतः समुद्र तल से 3000 से लेकर 9850 फीट की ऊंचाई तक देखा गया है.

इस पक्षी का औसत जीवन काल 10 से 15 साल का होता है,  संरक्षित कीये जाने पर इसका जीवन काल 19 वर्ष तक का दिखा गया है.

सेक्रेटरी बर्ड की लंबाई 35 से 54 इंच के बीच होती है,  इनका वजन ढाई किलो से 5 किलो के बीच होता है, इस पक्षी के पंखों का फैलाव 75 से 86 इंच तक होता है.

मादा सेक्रेटरी बर्ड  नर से थोड़ी ही छोटी होती है

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इस पक्षी को आसानी से पहचाना जा सकता है, इसका आधा शरीर बाज की तरह तथा आधा शरीर क्रेन पक्षी की तरह होता है इसके सर पर छतरी नुमा कलंगी पाई जाती है.

इस पक्षी के बाज़ के समान पंख होते हैं तथा एक मुड़ी हुई होती है परंतु इसके पंखा घुमावदार होते हैं

इसका शरीर मुख्य रूप से भूरे रंग का होता है इस पर कुछ सफेद पंख होते हैं उड़ते समय इनके काले पंख दिखाई देते हैं इनके चेहरे पर लाल नारंगी रंग के धब्बे पाए जाते हैं.

सभी शिकारी पक्षियों में इस पक्षी के पैर सबसे लंबे और सबसे अजीब होते हैं, एसा प्रतीत होता है जैसे इस पक्षी ने लम्बे काले मोज़े पहन रखे हों.

सेक्रेटरी बर्ड  हमेशा चलना पसंद करती है कभी-कभी उड़ान 1 दिन में 20 किलोमीटर के इलाके में चलती है

सेक्रेटरी बर्ड उड़ना पसंद नहीं करता है फिर भी यह उड़ने में दक्ष होते हैं यह काफी ऊंचाई पर उड़ते   हैं उड़ते वक्त यह अपने लंबे पैरों को पीछे की तरफ मोड़ लेते हैं.

उड़ते समय यह सारस पक्षी की तरह दिखाई देते हैं तथा जमीन पर यह बाज पक्षी की तरह दिखाई देते हैं.

सेक्रेटरी बर्ड अपना घोंसला Acacia trees पर बनाते हैं इसी पेड़ पर यह पक्षी अपना रात का समय भी  गुजारते हैं.

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क्या सूर्य धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है? sun is expanding

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क्या तारे अपना आकार बदलते हैं?

क्या आकाश में स्थित तारे अपना आकार बदलते हैं? क्या समय के साथ तारे बड़े होते जाते हैं या फिर वह सिकुड़ कर छोटे हो जाते हैं, क्या हमारा सूर्य जो की एक तारा है उसका आकार भी बदल रहा है समय के साथ क्या यह बहुत बड़ा होता जा रहा है, क्या सूर्य धीरे-धीरे बड़ा होता जा रहा है? जब हम आकाश में तारों को देखते हैं तो हमारे मन में ऐसे कई मनोरंजक प्रश्न उत्पन्न होते हैं, आइये इन प्रश्नों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

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क्योंकि हमारा सूर्य एक तारा है इसलिए हम इन प्रश्नों का जवाब सूर्य के उदाहरण से ही समझने क प्रयत्न करते हैं,  सूर्य पृथ्वी के सबसे नजदीक का तारा है, यह एक मध्यम आकार का तारा है, यूनिवर्स में सूर्य से भी बड़े बड़े तारे पाए जाते हैं.

सूर्य का आकर बढता जा रहा है Sun is expanding

जैसा कि आप जानते हैं एक तारा हाइड्रोजन गैस से बना होता है, अधिक तापमान और दबाव की वजह से दो हाइड्रोजन परमाणु मिलकर एक हीलियम का परमाणु बना लेते है, इस प्रक्रिया को नाभिकीय सल्लयन  की प्रकिर्या कहते हैं कहते हैं, तारों से निकलने वाले प्रकाश और ऊष्मा का कारण यही प्रक्रिया होती है. इस प्रक्रिया में द्रव्यमान का कुछ हिस्सा ऊर्जा में बदल जाता है, साथ ही साथ तारों की सतह से प्लाज्मा और विकिरण के रूप में  भी द्रव्यमान अंतरिक्ष में बिखरता रहता है इससे तारों का द्रव्यमान समय के साथ कम होता जाता है.

हमारा सूर्य भी समय के साथ धीरे धीरे अपना द्रव्यमान खोता जा रहा है, क्यों की सूर्य के अन्दर भी नाभिकीय सल्लयन होता है साथ ही साथ सूर्य से प्लाज्मा के रूप में पदार्थ बिखरता रहता  है इससे हमारे सूर्य का द्रव्यमान कम होता जा रहा है.

सूर्य के द्रव्यमान के कम होते जाने से इसका गुरुत्वाकर्षण कम होता जा रहा है, गुरुत्वाकर्षण के कम होने से सूर्य की सतह फैल रही है और धीरे-धीरे हमारे सूर्य का आकार बढ़ता जा रहा है, हालांकि सूर्य के अंदर इतनी हाइड्रोजन गैस मौजूद है कि यह 5 अरब सालों तक प्रकाशमान रह सकता है, अगले 5 अरब सालों तक सूर्य इसी तरह धीरे-धीरे बड़ा होता जाएगा, सूर्य की बाहरी सतह फैलती चली जाएगी.

जब सूर्य की समस्त हाइड्रोजन हीलियम में बदल जाएगी तो इसकी सतह टूटकर ब्रह्मांड में बिखर जाएगी और इसका आंतरिक क्रोड सिकुड़ कर छोटा वाइट ड्वार्फ तारा बन जाएगा, परन्तु घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि कुछ भी अचानक नहीं होगा बल्कि  सूर्य के अंत की शुरुआत 4.5 साल बाद शुरू होगी.

यूनिवर्स में मौजूद सभी तारों का यही हाल है, जैसे कि ओरायन तारामंडल में स्थित  बैटलग्युज़ तारा अपने जीवन के अंतिम चरण में है और इसका आकार बढ़ कर विशालकाय हो गया है इसे लाल ऐसे तारों को लाल दानव तारा कहते हैं.

इस तरह हम देखते हैं कि समय के साथ तारों का आकार बदलता रहता है यह उन के अंदर मौजूद हाइड्रोजन की मात्रा और गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है,  कई बार 2 तारे पास पास आते हैं एवं एक तारे का द्रव्यमान दूसरे तारे द्वारा खींच लिया जाता है जिससे कि पहले तारे का आकार बहुत छोटा हो जाता है,  कई बार किसी ब्लैक होल द्वारा भी तारे से हाइड्रोजन गैस खींच ली जाती है और तारे का आकार छोटा हो जाता है.

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सिर्फ 150 सोन चिरैया ही बची है भारत में Great Indian Bustard in Hindi

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ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सोन चिरैया

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जिसे की सोन चिरैया के नाम से जाना जाता है भारत का एक शानदार पक्षी है परंतु यह दुख की बात है कि अब केवल 150 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ही बचे हैं यह प्रजाति विलुप्ति  के कगार पर है तथा अति संकटग्रस्त प्रजाति की श्रेणी में रखी गई है.

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का वैज्ञानिक नाम Ardeotis nigriceps  हिंदी में इसे कई नामों से जाना जाता है जैसे  गोडावण, सोहन चिड़िया, हुकना, गुरायिन ‘सोन चिरैया’इत्यादि, यह एक बहुत बड़े आकार का पक्षी होता है जिसका क्षेतिज आकार का शरीर होता है तथा लंबे पैर होते हैं, जिसकी वजह से यह ऑस्ट्रिच पक्षी के समान दिखाई देता है, ऑस्ट्रिच पक्षी उड़ नहीं पता है परंतु ग्रेट इंडियन बस्टर्ड भारी होने के बावजूद उड़ सकता है, यह  उड़ने वाले पक्षियों में एक सबसे भारी पक्षी है, अतीत में यह भारतीय सूखे मैदानों में बहुतायत में मिलता था लेकिन अब इनकी संख्या केवल 150 ही बची है, यह एक संकटग्रस्त प्रजाति है जो की शिकार और अपने आवास के नष्ट होने की वजह से विलुप्त होने के कगार पर आ गई, इन शानदार पक्षियों का आवास सूखी घास के मैदान और अर्ध रेगिस्तानी इलाके होते हैं,  यह अक्सर काले हिरणों के साथ साथ दिखाई देते हैं क्योंकि दोनों का आवास लगभग एक ही जैसा है. भारत के वाइल्ड लाइफ प्रोटक्शन एक्ट 1972 के तहत यह एक संरक्षित पक्षी है.

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड  कहाँ पाया जाता है?

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड जिसे की सोन चिरैया के नाम से जाना जाता है भारत का एक शानदार पक्षी है परंतु यह दुख की बात है कि अब केवल 150 ग्रेट इंडियन बस्टर्ड ही बचे हैं यह प्रजाति विलुप्ति  के कगार पर है तथा अति संकटग्रस्त प्रजाति की श्रेणी में रखी गई है.

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड पक्षी पाकिस्तान में भी पाए जाते हैं परंतु यहां भी इनकी संख्या बहुत कम बची है, अतीत में यह लगभग पूरे भारत में पाए जाते हैं इनमें पंजाब हरियाणा उत्तर प्रदेश मध्य प्रदेश छत्तीसगढ़ उड़ीसा आंध्र प्रदेश राजस्थान गुजरात महाराष्ट्र कर्नाटक तमिलनाडु आंध्र प्रदेश आदि प्रदेश प्रमुख थे अब यह केवल केवल राजस्थान, गुजरात महाराष्ट्र कर्नाटक और तमिलनाडु में ही  पाया जाता है बाकी अन्य प्रदेशों से यह पूरी तरह लुप्त हो चुके हैं.

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड  क्या खाता है?

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड सोन चिरैया पक्षी सर्वाहारी पक्षी होता है, यह सभी प्रकार के कीट पतंगे खा लेता है यह सभी प्रकार के अनाज, छोटी छिपकलियां, चूहे सभी कुछ खा सकता है,  खेती वाले इलाकों में यह फसलों को नुकसान पहुंचा सकते हैं, क्योंकि यह अनाज और मूंगफली बड़े शौक से खाते हैं, अर्ध रेगिस्तानी इलाकों में पानी कम उपलब्ध होता है, पानी उपलब्ध होने पर यह पक्षी  बैठकर पानी पीता है तथा आस पास देखता रहता है, खतरा होने पर मादा पक्षी अपने बच्चों को पंख के नीचे छुपा लेती है यह बहुत ही शर्मिला पक्षी होता है तथा अक्सर लंबी घास के अंदर छुपा होता है.

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का प्रजनन और व्यहवार

ग्रेट इंडियन बस्टर्ड मार्च से सितंबर के बीच होता है,  प्रजनन काल के दौरान इसकी आवाज 500 मीटर दूर से भी सुनाई दी जाती है,  मादा सोन चिरैया पक्षी एक बार में एक ही अंडा देती है इस का घोंसला ज़मीन पर ही बना होता है, अंडों को सेने और बच्चों के पालन का कार्य केवल मादा ही करती है इस काम में नर भाग नहीं लेता है, इसके अंडों को कई प्रकार के जीवों से खतरा रहता है  जमीन पर चलने वाले शाकाहारी पशु इसके अंडों को कुचल सकते हैं, तथा कोव्वे इनके अन्डो को खा जाते हैं.

ग्रीटइंडियन बस्टर्ड  के संरक्षण का कार्य किस राष्ट्रीय अभ्यारण में किया जा रहा है?

राजस्थान सरकार ने इस पक्षी को बचाने के लिए प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड की शुरुआत की है यह प्रोजेक्ट सन 2013 में वर्ल्ड एनवायरनमेंट डे के दिन शुरू किया गया है इस प्रोजेक्ट के तहत ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के आवास स्थल और प्रजनन स्थल की पहचान करना, उसे बचाना और सुरक्षित करना मुख्य उद्देश्य है.

इस पक्षी को बचाने के लिए कई राष्ट्रीय पक्षी अभयारण्य काम कर रहे हैं,  जैसलमेर के निकट डेजर्ट नेशनल पार्क अभयारण्य में इस पक्षी को बचाने के लिए काफी कार्य किया जा रहा है गुजरात के कच्छ डिस्ट्रिक्ट में स्थित अबदासा मैं भी इन की कुछ संख्या को बचाया जा रहा है, अन्य प्रदेशों में निम्न अभयारण्यों में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड को संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा है.

Naliya in Kutch,

Karera Wildlife Sanctuary in Shivpuri district

Great Indian Bustard Sanctuary near Nannaj,18 km from Solapur in Maharashtra,

Shrigonda taluka in Ahmednagar district of Maharashtra,

Chandrapur district in Maharashtra

Rollapadu Wildlife Sanctuary, Kurnool in Andhra Pradesh.

Ranibennur Blackbuck Sanctuary,

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ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल धनेश पक्षी कैसा हौता है

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भारत का शानदार पक्षी ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल

हमारे देश भारत में कई प्रकार सुंदर रंग-बिरंगे पक्षी पाए जाते हैं, कई पक्षी तो ऐसे हैं जो सिर्फ भारत में ही पाए जाते हैं, इन्हीं में से एक बहुत बड़े आकर का शानदार पक्षी ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल है इस का हिंदी नाम धनेश पक्षी है तथा इसका वैज्ञानिक नाम Buceros bicornis है , हॉर्नबिल पक्षी कई प्रकार के होते हैं इन्ही में से एक ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल भी है यह भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण पूर्व एशिया में पाया जाता है, इसके बड़े आकार और रंगीन पंखों से प्रभावित होकर कई जनजातीय संस्कृतियों में इसे अच्छा माना जाता है,  ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल काफी लंबे समय तक जीवित रहता है, इसका जीवनकाल 50 वर्ष का होता है, जंगल में ये सबसे बड़े फल खाने वाले पक्षी होते हैं, परन्तु ये मौका परस्त होते हैं ये समय-समय पर छोटे स्तनधारी प्राणी और यहां तक कि छोटे पक्षियों को भी खा जाता है, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल प्रवासी पक्षी नहीं है, यह हिमालय के जंगलों में और वेस्टर्न घाट के जंगलों में पाया जाता है. यह अपना सारा समय घने जंगलो में व्यतीत करता हे इसलिए इसे तेज़ गति से उड़ने की आवश्यकता नहीं होती, यह कारण है की इसके उन्दने की गति मध्यम होती है.

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल को केसे पहचाने Great Indian Hornbill

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल एक बहुत बड़े आकार का पक्षी होता है, इसका आकार 37 इंच से लेकर 51 इंच तक हो सकता है इसके पंखों का फेलाव 60 इंच का होता है तथा इसका भार ढाई से 4 किलो के बीच पाया गया है, हॉर्नबिल की प्रजाति में यह सबसे भारी पक्षी होता है, मादा इंडियन हॉर्नबिल नर से छोटी होती है जिसकी आंखें नीली सफेद होती है नर पक्षी की आंखें लाल रंग की होती है

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल की सबसे अजीब विशेषता इसकी बड़ी चोंच के ऊपर सर पर स्थित पीले केसरिया लाल रंग की टोपी जैसी संरचना होती है, जिसकी वजह से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है, मादा पक्षी में इस टोपी का रंग पीछे की तरफ लाल होता है,  इसके पंखों के फड़फड़ाने की आवाज बहुत तेज होती है जब यह उड़ान भरता है तो इसकी आवाज बहुत दूर से सुनी जा सकती है. यह जंगलों के ऊपर उड़ते हैं.

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी का वैज्ञानिक वर्गीकरण Great Indian Hornbill

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी का वर्गीकरण किया गया है

Scientific classification

Kingdom: Animalia

Phylum: Chordata

Class: Aves

Order: Bucerotiformes

Family: Bucerotidae

Subfamily: Bucerotinae

Genus: Buceros

Species: B. bicornis

Binomial name Buceros bicornis

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी कहाँ पाया जाता है? Great Indian Hornbill

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी भारत भूटान नेपाल मलेशिया कंबोडिया इंडोनेशिया सुमात्रा आदि देशों में पाया जाता है, इन पक्षियों के समूह अलग-अलग जंगलों में बिखरे हुए होते हैं, इन पक्षियों की कुछ आबादी तो हिमालय के आस पास पाए जाने वाले जंगलों में पाई जाती है तथा कुछ आबादी भारत के वेस्टर्न में घाट के जंगलों में पाई जाती है, इंडियन हार्न बिल पक्षी का आवास  बहुत घने जंगल होते हैं इन्हें पहाड़ी इलाकों के आसपास के घने जंगल पसंद है, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी को काफी बड़े इलाके की आवश्यकता होती है, एक हॉर्नबिल पक्षी के जोड़े को प्रजनन काल के मौसम में 4 वर्ग किलोमीटर की और वर्ष भर इन्हें करीब 15 वर्ग किलोमीटर इलाके की आवश्यकता होती है.

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ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी क्या खाते हैं  Great Indian Hornbill

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी छोटे-छोटे समूह में देखे जाते हैं केवल फलदार वृक्षों पर ही इनके बड़े झुण्ड  देखे जा सकते हैं दक्षिणी पूर्वी भूटान में इनके 150 से 200 के झुंड में देखे गए, ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी की खुराक मुख्यतः फल ही हैं ये अंजीर को खासतौर पर बहुत पसंद करते हैं, परन्तु यह मौका परस्त पक्षी है मौका मिलने पर यह छोटे स्तनधारी प्राणी, छिपकलियां और  छोटे पक्षियों को भी खा लेता है.

ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी का प्रजनन  Great Indian Hornbill

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ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल पक्षी का का प्रजननकाल  जनवरी से अप्रैल के बीच होता है, इस दौरान ये काफी शोरगुल मचाते और तेज आवाज निकालते हैं इनकी आवाज kok kok  की तरह होती है मादा और नर एक ही तरह की आवाज निकलते हैं.

मादा हॉर्नबिल पक्षी पेड़ के खोखले ताने में घोंसला बनाती है, अंडा देने के बाद यह  घोसले को अन्दर से बंद कर देती है तथा केवल एक छोटा सा छेद ही खुला रखती है, अंडे सेने के दौरान  मादा इस घोसले में ही बंद रहती है, इस दौरान नर खाने का प्रबंध करता है और छोटे से छेद में से मादा को खाना देता रहता है, एक बार में मादा केवल एक से दो ही अंडे देती है इन अंडों से बच्चे 30 से 40 दिनों मैं निकलते हैं.

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जानिए कैसा होता है सुन्दर सुरखाब या चकवा पक्षी

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सुरखाब पक्षी की रोचक जानकारी

अक्सर आपने सुरखाब पक्षी और चकवा पक्षी के बारे में सुना और पढ़ा होगा, पर क्या आप जानते हैं की यह एक ही पक्षी के दो नाम हैं, आइये जानते हैं इस सुन्दर पक्षी के बारे में

चकवा – सुरखाब पक्षी बहुत ही सुंदर पक्षी होता है यह हंस वर्ग का सदस्य है,   चकवा – सुरखाब पक्षी के कई नाम प्रसिद्ध है अंग्रेजी में इसे Ruddy Shelduck  कहते हैं इस का वैज्ञानिक नाम Tadorna ferruginea है, इसका एक नाम सुरखाब बहुत प्रसिद्द है, इस पक्षी के पंख इतने सुन्दर होते हैं की इन पंखो पर एक मज़ेदार  कहावत बन गयी है, अक्सर उलाहना देने के लिए यह कहा जाता है की “उसमे कौन से सुरखाब के पंख लगे हैं?”

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यह अनोखा जलीय पक्षी है जो झील और तालाब के किनारे रहना पसंद करता है,  इसका आकार 45 -58 सेंटीमीटर के बीच होता है, इसके पंखों का फैलाव 110 से 135 सेंटीमीटर तक होता है,  चकवा – सुरखाब पक्षी देखने में अत्यंत सुंदर होता है इसके शरीर का रंग सफेद और गहरा नारंगी भूरा होता है,  इसकी पूंछ और पंख काले-सफ़ेद होते हैं यह प्रवासी पक्षी है जो की सर्दियों का वक्त भारतीय उपमहाद्वीप में व्यतीत करता है यह अपना प्रजनन काल दक्षिणी यूरोप और मध्य एशिया में व्यतीत करता है, इसकी आवाज बहुत तेज हॉंक हॉंक जैसी होती है.

चकवा – सुरखाब पक्षी नदी तालाबों झीलों के आसपास ही पाए जाते हैं,  चकवा – सुरखाब के बारे में कथा प्रसिद्ध है कि इसे श्राप दिया गया है की दिन में तो नर और मादा साथ रहते हैं लेकिन रात में चकवा – चकवी अलग अलग हो जाते हैं जिससे कि यह वियोग में तड़पते रहते हैं और एक दूसरे को पुकारते रहते हैं,  वास्तव में यह केवल साहित्य की कहानियों और कविताओं में दी गयी उपमा मात्र है.

चकवा – सुरखाब पक्षी उम्र भर के लिए जोड़ा बनाते हैं, यह पानी से काफी दूरी पर घोंसला बनाता है , मादा एक बार में 8 अंडे देती है,  मादा चार हफ्तों तक इन अन्डो को सेती है, अंडों से निकले हुए बच्चों का पालन माता पिता दोनों मिलकर करते हैं, अंडों से निकलने के 8 हफ्ते बाद सुरखाब के बच्चे उड़ने लगते हैं.

मध्य और पूर्वी एशिया में इनकी संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है, यूरोप में इनकी संख्या में लगातार कमी आती जा रही है, कुल मिलाकर पूरी दुनिया में चकवा – सुरखाब पक्षी की अच्छी आबादी मौजूद है इसलिए इन्हें कम चिंता वाले जीवों की श्रेणी में रखा गया है.

चकवा – सुरखाब पक्षी एक रात्रिचर पक्षी होता है, यह रात्रि में ही सक्रिय होता है, यह सर्वाहारी पक्षी है जो की घास, छोटे अंकुर, छोटे पौधे, अनाज तथा कीट पतंगे खा लेता है यह केवल पानी की सतह पर ही तैरता है  बत्तख की तरह पानी के अंदर गोता नहीं लगाता.

चकवा – सुरखाब पक्षी हमेशा जोड़ों में ही देखे जाते हैं, कभी-कभी यह छोटे झुण्ड में भी दिख जाते हैं, सर्दियों के समय प्रवास के दौरान झीलों के किनारे इनके बड़े झुंड एकत्रित हो जाते हैं.

चकवा – सुरखाब पक्षी मध्य एशिया में प्रजनन के लिए मार्च से अप्रैल के महीने में आते हैं, नर और मादा में आपसी संबंध बहुत मजबूत होता है यह अपने इलाकों की बहुत आक्रामकता से रक्षा करते हैं.

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क्या गॉडज़िल्ला Godzilla जेसा विशालकाय जीव पृथ्वी पर चल सकता है?

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भय से उत्पन्न हुआ है गॉडज़िल्ला Godzilla

आप सभी ने भयानक विशालकाय गॉडज़िल्ला Godzilla प्राणी को फिल्मों में अवश्य देखा होगा, इस प्राणी के बारे में आपके मन में कई प्रकार के प्रश्न होंगे, गॉडज़िल्ला Godzilla के बारे में अक्सर कई प्रकार के प्रश्न पूछे जाते हैं जैसे कि क्या गॉडज़िल्ला Godzilla एक डायनासोर है? गॉडज़िल्ला Godzilla किस प्रकार का डायनासोर है? क्या गॉडज़िल्ला Godzilla वास्तव में होते हैं? गॉडज़िल्ला Godzilla का नाम गॉडज़िल्ला क्यों रखा गया? इत्यादि, आइए  गॉडज़िल्ला Godzilla के बारे में इन रोचक प्रश्नों का उत्तर जानने का प्रयत्न करते हैं.

गॉडज़िल्ला Godzilla वास्तविक प्राणी नहीं है?

गॉडज़िल्ला Godzilla एक वास्तविक प्राणी नहीं है, ना तो वर्तमान में और ना ही अतीत में इस प्रकार के विशालकाय प्राणी पाए जाते थे, यह एक काल्पनिक जीव है, इस जीव की कल्पना जापान के किस्सों कहानियों और फिल्मों में की गई है.

गॉडज़िल्ला Godzilla एक काल्पनिक जीव है जोकि इसी नाम की जापानी फिल्मों में दिखाया जाता है,  इसे सबसे पहले सन 1956 में आई फिल्म Godzilla में दिखाया गया था यह फिल्म Ishiro Honda ने बनाई थी,  यह फिल्म काफी लोकप्रिय हुई और तभी से गॉडज़िल्ला Godzilla एक विश्व प्रसिद्ध काल्पनिक जीव बन गया, इसे मॉन्सटरस का राजा यानी की देत्यों का राजा कहा जाने लगा.

गॉडज़िल्ला Godzilla फिल्मों में इस प्राणी का चित्रण किया इस प्रकार किया जाता है कि यह समुद्र में रहने वाला एक बहुत विशालकाय खतरनाक और विनाशकारी जीव है, न्यूक्लियर रेडिएशन की वजह से समुद्र के इस भयानक जानवर में म्यूटेशन उत्पन्न हो गया है जिससे कि यह आकार में इतना बड़ा हो गया है तथा यह एटॉमिक रेडिएशन से युक्त आग अपने मुंह से उगल सकता है.

भय से उत्पन्न हुआ है गॉडज़िल्ला Godzilla

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गॉडज़िल्ला Godzilla की उत्पत्ति वास्तव में  परमाणु बमों के भय की वजह से हुई थी, द्वितीय विश्व युद्ध में अमेरिका ने  जापान के नागासाकी और हिरोशिमा द्वीपों पर विनाशकारी परमाणु बम गिराए थे, जिससे लाखों लोग मारे गए थे और रेडिएशन की चपेट में आ गए थे, परमाणु बमों का यह विनाश जापान के लोगों ने अपनी आंखों से देखा और भोग था उनका यही भय उनके कहानी किस्सों और आगे चलकर फिल्मों में भी गॉडज़िल्ला Godzilla के रूप में प्रकट हुआ.

गॉडज़िल्ला Godzilla का नाम गॉडज़िल्ला Godzilla क्यों रखा गया है?

गॉडजिला नाम जापानी शब्द Gojira  का अंग्रेजी रूपांतरण है, जैपनीज़ शब्द Gojira  दो शब्दों से मिलकर बना है पहला gorira इसका मतलब होता है गोरिल्ला और दूसरा kujira  इसका मतलब होता है इस तरह Gojira का मतलब हुआ गोरिल्ला व्हेल.,

क्या गॉडज़िल्ला Godzilla डायनासोर है ?

गॉडज़िल्ला Godzilla जीवो की कल्पना इस प्रकार की गई है कि ऐसा लगता है कि यह तीन अलग-अलग डायनासोरों को मिलाकर बनाया गया है गॉडज़िल्ला Godzilla के पीठ पर पाई जाने वाली प्लेट्स स्टैगोसोरस डायनासोर के समान है, गॉडज़िल्ला Godzilla के चलने का तरीका इगुआनाडॉन डायनासोरों के जैसा है, इसके आगे के छोटे पैर और पंजे पूरी तरह टी रेक्स डायनासोर के समान है. गॉडज़िल्ला Godzilla डायनासोर नहीं है बल्कि एक काल्पनिक  समुद्री जीव है.

गॉडज़िल्ला Godzilla पर कितनी फिल्मे बन चुकी हैं?

सन 1954 से लेकर अब तक गॉडज़िल्ला Godzilla पर 31 फिल्मों का निर्माण हो चुका है इसमें से तीन अमेरिका के हॉलीवुड में बनी है तथा बाकी जापान में बनी है.

क्या गॉडज़िल्ला Godzilla जैसा विशालकाय जीव पृथ्वी पर चल सकता है?

वैज्ञानिकों के अनुसार गॉडज़िल्ला Godzilla जैसा विशालकाय जीव कभी भी पृथ्वी पर नहीं चल सकता,  इसका कारण है उसका विशाल आकार एवं भार, जैसे ही यह भयानक विशालकाय जीव पृथ्वी पर कदम रखेगा तो इसके भार से ही इसके पैर जमीन में धंस जाएंगे, अत्यधिक भार  की वजह से इसकी हड्डियां और हड्डियों के आसपास के उत्तक इतना भार संभाल नहीं पाएंगे और टूट जाएंगे जिससे कि यह जमीन पर गिर जाएगा.

गुरुत्वाकर्षण के अलावा भी  कई ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से गॉडज़िल्ला Godzilla कभी भी पृथ्वी पर नहीं रह सकता, इतने विशालकाय जीव को जीवित रहने के लिए 215 मिलियन कैलोरी प्रतिदिन की आवश्यकता होगी, इतना अधिक भोजन प्राप्त करना किसी भी जीव के लिए असंभव है इसलिए पृथ्वी पर इतने विशालकाय जीव कभी भी नहीं उत्पन्न नहीं हो सकता है.

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शानदार मकाउ तोते के 25 रोचक तथ्य 25 facts Macaw Parrot hindi

दुनिया के सबसे बड़े और रंगीन तोते Macaw Parrots

दक्षिण अमेरिका के जंगलों में बहुत बड़े आकार के रंग बिरंगे तोते पाए जाते हैं इन्हें मकाउ पैरेट Macaw कहा जाता है, यह तोते इतने सुंदर और आकर्षक होते हैं की कई लोग इन्हें पालतू बनाना पसंद करते हैं,  लाल और नीले रंग के इतने बड़े आकार के तोते को उड़ते हुए देखकर सभी आश्चर्यचकित हो जाते हैं, यह मनुष्य की आवाज की नकल भी कर सकते हैं, हालाँकि इतने बड़े तोते को पालना आसान नहीं होता है.

आइए जानते हैं मकाउ तोते Macaw Parrot के बारे में कुछ रोचक तथ्य,  इन तथ्यों से आपको मकाउ तोते के बारे में संपूर्ण जानकारी प्राप्त हो जाएगी,  जैसे कि मकाउ तोते कहां रहते हैं, मकाउ तोते क्या खाते हैं, मकाउ तोते की उम्र कितनी होती है आदि.

मकाउ तोते के बारे में 25 रोचक तथ्य 25 Facts of Macaw Parrot in hindi

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पृथ्वी पर पाए जाने वाले 370 तोतों की प्रजातियों में मकाउ तोते सबसे बड़े होते हैं

1 मकाउ तोते Macaw Parrot का वजन 2 किलो तक हो सकता है.

मकाउ तोता दक्षिण अमेरिका के जंगलों में पाए जाते हैं. दुनिया भर में लोग इस तोते को पिंजरे में रख कर पाल्तें हैं.

मकाउ तोते दिन में सक्रिय होते हैं, ये सूरज की पहली किरण के साथ ही उठ जाते हैं और चिल्लाना शुरू करते हैं इसलिए अगर आप मकाउ तोते को पालतू बनाते हैं तो इस इस बात का आपको ध्यान रखना  होगा.

Macaw Parrot के रंग बिरंगे  शरीर को देखकर आप आश्चर्यचकित हो जायेंगे इसके शरीर पर गहरे लाल नीले हरे और पीले पंख होते हैं.

मकाउ तोते की चोंच बहुत कठोर होती है जिससे यह कड़े फलों को भी तोड़ देते हैं यह आपकी उंगलियों को भी चोट पहुंचा सकते हैं.

मकाउ तोते के पंजे मजबूत पकड़ वाले होते हैं क्योंकि ये अक्सर पेड़ों पर और पहाड़ों की ढलान ऊपर लटकते रहते हैं.

मकाउ तोते अपने भोजन की तलाश में 15 से 20 किलोमीटर तक उड़ान भर सकते हैं यह अपनी भोजन की तलाश में सुबह ही निकल पड़ते हैं

मकाउ तोता पूरी उम्र भर के लिए जोड़ा बनाते हैं, Pet Macaw Parrot पालतू  बनाए जाने पर यह अपने मालिक से काफी घुल मिल जाते हैं.

मकाउ तोते की कुल 17 प्रजातियां पाई जाती है लगभग सभी प्रजातियां संकटग्रस्त प्रजातियां हैं.

मकाउ तोते की यह 3 प्रजातियां सबसे ज्यादा संकट में है red-fronted macaws, blue-throated macaws, hyacinth macaws.

सबसे बड़ा मकाउ तोता hyacinth macaw   होता है इसका आकार साढे 3 फ़ीट तक होता है इसके पंखों का  फैलाव डेढ़ मीटर तक होता है.

सबसे छोटा मकाउ तोता mini macaws  होता है यह केवल 12 इंच का ही होता है.

मकाउ तोते की उम्र बहुत ज्यादा होती है यह 70 से 80 साल तक जीवित रहते हैं, pet macaw parrot  मकाउ तोते को पालतू बनाने के लिए यह बात बहुत अच्छी है, इससे किसी अकेले व्यक्ति को उम्र भर के लिए एक साथी मिल जाता है.

मकाउ तोते 40 मील प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ सकते हैं, कुछ मकाउ तोते की चोंच इतनी ताकतवर होती है कि वह इससे नारियल को भी तोड़ सकते हैं.

दो मकाउ तोतों के चेहरे के पंखों का पैटर्न एक जैसा नहीं होता जिस प्रकार की मनुष्यों की उंगलियों के निशान एक जैसे नहीं होते हैं.

अमेजॉन के जंगल में रहने वाले मकाउ तोते Macaw parrots नदी के आसपास की मिट्टी खाते हैं, ऐसा कहा जाता है कि जहरीले फलों का असर खत्म करने के लिए मिट्टी खाते हैं वैज्ञानिकों के अनुसार यह विटामिन बी प्राप्त करने के लिए ऐसा करते हैं.

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मकाउ तोता सर्वहारी होते हैं यह फल मेवे बीज छोटे स्तनधारी प्राणी सरीसर्प और अंडे खाते हैं यह कुछ जहरीले पौधों की पत्तियां भी खा लेते हैं.

मकाउ तोते सामाजिक होते हैं तथा 30 तक के झुंडो में देखे जा सकते हैं

मादा मकाउ  एक बार में केवल 2 से 4 अंडे देती है,  मादा अंडों को 25 दिन तक सेती है इस दौरान मकाउ तोता भोजन का प्रबंध करता है,  मकाउ तोते के बच्चे 105 दिनों में उड़ना शुरू करते हैं 1 वर्ष तक बच्चे अपने माता पिता के साथ ही रहते हैं.

scarlet macaw तोता होंडुरास देश का राष्ट्रीय पक्षी है

मकाउ तोता को चबाना और कुतरना पसंद होता है पालतू मकाउ तोते को खुला छोड़ देने पर वह घर की कई चीजों को चबाकर नष्ट कर सकते हैं.

मकाउ तोते के लिए चेरी एवोकैडो कॉफी बिना पका हुआ मांस और चॉकलेट हानिकारक होती है इसलिए पालतू मकाउ तोते को यह चीज नहीं खिलानी चाहिए.

पालतू मकाउ तोता आक्रामक भी हो जाते हैं, तथा यह ध्यान आकर्षित करने के लिए जोर जोर से चिल्लाते हैं,  पालतू मकाउ तोता सिखाये जाने पर कई तरह के कार्य सीख जाते हैं और मनुष्य की आवाज में कुछ शब्द भी बोल सकते हैं.

अगर आपके घर में दूसरे छोटे पक्षी या  पालतू जानवर है तो मकाउ तोता उनके लिए खतरनाक  साबित हो सकते हैं, इसलिए उन्हें खुला नहीं छोड़ा जाना चाहिए, मकाउ तोते साफ़ पानी पीते हैं पालतू मकाउ तोते को हल्के गुनगुने पानी से नहलाना चाहिए समय-समय पर पालतू मकाउ तोते की बड़ी हुई चोंच को छोटा करने की आवश्यकता होती है, इसके लिए पेट स्टोर में कई तरह के टूल्स मिलते हैं.

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